यु पी ए सरकार के आज दो बर्ष हो गए है . इन दो बर्षो में इस सरकार ने काफी उतार-चढ़ाव देखे है . उतार ज्यादा देखे है और चढ़ाव नहीं के बराबर देखे है . यु पी ए सरकार की यह पारी आरम्भ से ही बदनामी की चादर ओढ़ी हुई है.अभी तक संसय की स्थिति है कि सरकार की बागडोर मनमोहनजी के हाथ में है या मैडम सोनियाजी के हाथ में .
महंगाई और भ्रस्टाचार की मार से यह सरकार उबर ही नहीं पा रही है . इन दो बर्षो में महंगाई पर नियंत्रण करना तो दूर हर महीने यह महंगाई कुछ बढ़ ही जाती है. परन्तु आम जनता की आमदनी उतनी नहीं बढ़ पाती है. सत्ता में बैठे लोग अपने आप को इसे रोकने में असमर्थ बता रहे है. दरसल वो बड़े बड़े घोटालो के जाल में इस तरह फंसे हुए है कि जनता के बारे में सोचने का समय ही नहीं है.
आप सब जानते है कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार अगर नहीं पड़ी होती तो मनमोहन सरकार को राजा, कलमाड़ी और कनीमोझी जैसे लोगो को सलाखों के पीछे पहुचाने में और कई साल लग जाते .शायद उन्हें जेल पहुंचाते पहुंचाते सरकारे भी बदल जाती .
पिछले साल की वह घटना याद होगी जब अनाज की अनेको बोरिया बारिश की भेट चढ़ गई थी और कोर्ट ने इस मामले में दखलंदाजी करते हुए आदेश दिया था कि यह अनाज गरीबो में तत्काल बाँट दिया जाय , परन्तु हमारे माननीय कृषि मंत्री को पता नहीं क्यों यह बात पसंद नहीं आई थी.
इस बर्ष कोर्ट ने पहले से ही सरकार को चेता दिया है कि देश का कोई भी व्यक्ति भूखमरी से मरना नहीं चाहिए आगे देखते है क्या होता है.
माननीय कृषि मंत्री का दूध और चीनी का मूल्य बढ़ाने में अहम् यागदान रहा . यहाँ तक कि मीडिया से जुड़े कई लोगों ने उन्हें महंगाई का ज्योतिषी भी कह दिया.
पेट्रोल और डीजल के दाम का तो कहना ही क्या यह तो एक दानव की तरह आम जनता के कमाई का एक बड़ा हिस्सा चट करने लगा है.
काले धन को देश में वापस लाने के मामले में इस सरकार को तो अभी बहुत कुछ करना बाकी है . इस मामले में सरकार या तो कोई ठोस कदम उठाना ही नहीं चाहती है या फिर छोटे मोटे कदम से जनता को संतुष्ट करने का प्रयास कर रही है.
फिलहाल यु पी ए सरकार के पास न तो ख़ुशी जाहिर करने लायक कोई मुद्दा है और न ही इन दो सालो में कोई उपलब्धि . कुल मिला के इस सरकार को वर्तमान परिस्थिति में जश्न की नहीं बल्कि चिंतन और मनन की अधिक आवश्यकता है.








