स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें

शनिवार, 28 मई 2011

आई आई टी और सुपर -30

वर्तमान समय में अधिकांश माँ बाप अपने बच्चो को इंजीनियर बनता हुआ ही देखना चाहते है .

 इंजीनियरिंग के लिए भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान ( आई आई टी )भारत का सबसे महत्वपूर्ण संस्थान है.
 हर छात्र के लिए इस संस्थान से जुड़ना एक सपने के सामान है और छात्र उस सपने को पूरा करने के लिए भरपूर प्रयास करते है.

आई आई  टी मुंबई हो या कानपुर सभी छात्रों को एक प्रवेश परीक्षा से होकर गुजरना पड़ता है और इस प्रवेश परीक्षा में सफल छात्र ही आई आई टी और इससे संबध संस्थानों में प्रवेश पा सकते है. इस प्रवेश परीक्षा में सफल होने के लिए छात्र  दुसरे राज्यों में भी जाकर विभिन्न कोचिंगो का सहारा लेते है .
इसी क्षेत्र में बिहार का एक नाम अपनी अलग छवि बनाने में लगातार कामयाब हो रहा है और आज कल सुर्ख़ियों में है.

जी हाँ हम आनंद कुमार द्वारा संचालित सुपर -  30  की बात कर रहे है. आनंद कुमार ने करीब एक दशक पहले इस कोचिंग को शुरू किया .जिसमे वे गरीब तबके के तीस प्रतिभावान छात्रों को निशुल्क कोचिंग देते है. इन तीस छात्रों के रहने ,खाने ,सोने की पूरी व्यवस्था आनंद कुमार द्वारा की जाती है. आनंद कुमार इसके लिए धन की व्यस्था अपने एक अन्य संस्थान से करते है. 

इस बार तीस छात्रों में से चौबीस छात्रों का चयन इस परीक्षा में हुआ है जबकि पिछले तीन बर्षो से सभी तीस के तीस विद्यार्थियों का चयन हो रहा था . इस साल के नतीजे से वे बिलकुल भी मायूस नहीं है.  इस बर्ष चयनित छात्रों में मोबाईल मेकेनिक, खोमचे वाले ,ट्रक ड्राईवर और किसान के बेटे शामिल है.

अब तक आनंद की इस कोचिंग के माध्यम से 236 छात्र आई आई टी में प्रवेश पा चुके है. अपने इस बेहतरीन प्रयास के लिए आनंद कुमार को अनेक राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके है .टाइम मैगजीन ने उनके कोचिंग  सुपर -30 को बेस्ट ऑफ एशिया 2010 में शामिल किया था .

आनंद कुमार का एडमिशन ब्रिटेन के प्रतिष्ठित कैंब्रिज विश्वविद्यालय में हो गया था लेकिन पैसे की कमी की वजह से वह पढ़ाई के लिए वहां नहीं जा पाए. आनंद के मुताबिक उस दिन के बाद से ही उन्होंने सोच लिया कि अपने अधूरे सपनों को वह गरीब तबके के छात्रों के जरिए पूरा करेंगे. समझ में ये नहीं आ रहा है कि हम उनके अधूरे सपने पर अफ़सोस करे या ख़ुशी जाहिर करे .हमारे देश से अनेको छात्र विदेशो में जाकर वहां अपनी प्रतिभा दिखाते है और एक सफल व्यक्ति माने जाते है. परन्तु बहुत कम ही व्यक्ति ऐसे होते है जो सफलता पाने के बाद मुड़कर पीछे देखते है और अपने देश और मिटटी के बारे में सोचते है. शायद उनका विदेश न जाना हमारे देश के हित में ही रहा . 

आने वाले दिनों में गरीबों के लिए पढाई और महँगी होती जाएगी तब शायद एक नहीं अनेकों आनद कुमार की हमें जरुरत होगी. भविष्य में वे एक विश्वविद्यालय की भी स्थापना करना चाहते है जो केवल गरीब विद्यार्थियों के लिए होगा. हम उनको शुभकामनाये देना चाहते है कि वो अपने मुहीम में कामयाब हों. 

11 टिप्‍पणियां:

Patali-The-Village ने कहा…

आनंद जी को मेरी बहुत बहुत शुभकामनाएँ व आशीर्वाद| धन्यवाद|

शिखा कौशिक ने कहा…

rekha ji aapne jo aanand ji ke bare me bataya hai bahut vistar se aur sahi dhang se bataya hai.aanand ji aaj ke yug ke role-model hain aur sahi vyakti se sahi roop me milvane ke liye aap bhi aabhar kee haqdar hain.

Raj ने कहा…

आनंद कुमार को अपने विद्यार्थियों से वचन लेना चाहिए की वे विदेशो में बसकर आराम फरमाने की जगह देश सेवा करेंगे .

बेनामी ने कहा…

Thanks for giving this valuable information.
Sandhya/Rahul

minoo bhagia ने कहा…

best wishes to anand

mahendra verma ने कहा…

आनंद कुमार जी को बधाई एवं शुभकामनाएं।
उनके बारे में जानकर अच्छा लगा।

Sunil Kumar ने कहा…

आनंद कुमार जी जैसे लोग ही देश का गौरव होते है उनको मेरा नमन .......

सदा ने कहा…

आनन्‍द जी जैसे लोग कम ही होते हैं ...उनका यह प्रयास अनुकरणीय एवं सराहनीय है ... शुभकामनाओं के साथ प्रस्‍तुति के लिये आभार ।

upendra shukla ने कहा…

आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है
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जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

आपने कितने सरल शब्दों में बताया है,

veerubhai ने कहा…

आनंद जी से परिचय करवाया आपने ,शुक्रिया .हर कोई इंजिनीयर बनना क्यों चाहता है .रुझान भी तो कुछ होता होगा बच्चे का अपना .पैदा होते ही माँ -बाप उसपे क्यों तारी हो जातें हैं .विकसने दो उसे .